Jyotiraditya Scindia

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Dear Maharaj,

I am shocked and disheartened by your exit from my party. A party that you joined on 18.12.2001, after the demise of your father Late Madhvrao ji Scindia and pledged to uphold the “secular, liberal and social justice values”.

We Congress workers had always looked up to you for your forthrightness, energy and sincerity that you offered. I had the privilege in meeting you once when you had come to campaign for Girija ji Vyas during the 2018 Rajasthan Assembly Elections.

I was hoping against hope that all the drama of the past 2-3 days was about creating pressure on the Congress Central Leadership to pay heed to your demands. Never in my wildest dreams did I think that you would leave Congress to join some other party.

You were a member of my party for 19 years now, out of which you were MP for 18 years, a Central Minister and always had a say in the functioning of the party. पार्टी ने आपको बहुत कुछ दिया और आप का भी योगदान कभी कम नहीं रहा !!

हम जानना चाहते हैं की ऐसा क्या हुआ की आपको यह कदम लेना पड़ा, क्योंकि मीडिया में बताये तथ्य स्वीकार करने लायक नहीं है. I refuse to believe that the top leadership didn’t grant you an appointment nor did they hear you out. I agree my party has suffered debacles one after another in the recent past but this is the time you were needed the most but यह हो न सका!!

Ever since your exit people have been telling me to explore other options but how can I leave the party that has given me and my family so much and similarly couldn’t you have been a little more patient.

But like they say politics is the art of possibilities, you have chosen your new path and we congress workers will walk our own long arduous path as long as it takes to uphold the “secular, liberal and social justice values”.

All the best for your future and I wouldn’t get into mud-slinging and just end with the following couplet :

“तुम्हारा मुँह फेर लेना मेरे लिए काफ़ी था

रिश्तों को इल्ज़ाम की दहलीज़ तक ना लाओ “

Regards,

Deepak Sukhadia

एक युग का समापन

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आज सुबह जैसे ही उठा और अपना मोबाइल देखा तो एक मेसेज पड़ा और ज्ञात हुआ की आज भानु का तेज और प्रकाश हमारे जीवन से हमेशा हमेशा के लिए चला गया .

हृषिकेश भैया का यह मेसेज अपने साथ न सिर्फ आदरणीय भानु कुमार जी शास्त्री जी के निधन और उनकी सफल और प्रेरणादायक जीवन यात्रा का अंत लाया था और शायद उसी के साथ उनके और मेरे दादा स्व. मोहनलाल जी सुखाड़िया के ज़माने के उसूलवादी , सहजता अवं आत्मीयता वाली राजनीती अवं राजनीतिज्ञों पर पूर्णविराम था. आदरणीय भानु जी ऐसे युग का नेतृत्व किया जहाँ द्वेष, बदले और प्रतिद्वंदी के प्रति असम्मान की कोई जगह नहीं थी. वोह उस दौर के नेता था जहाँ राजनीती सेवा थी ना की रोज़गार का एक और साधन.

मेरा सबसे पहले उनसे वाकिफ मेरी दादी स्व. इन्दुबाला जी सुखाड़िया के लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ जो वह भानु कुमार जी के सामने लड़ रहीं थी. मैं लगभग ६-७ साल का था और ऐसे ही हम सब घर के बच्चे बे-सर-पैर के नारे लगा रहे थे भानु जी के खिलाफ. मुझे आज भी याद है की दादी ने मुझे डआंट लगायी और कहा की ऐसे नहीं करते. यह था प्रतिद्वंदी की प्रति सम्मान. समय बीतता गया और साथ ही जानने के मौका मिला की हमारे परिवार का कोई भी शुभ काम उनके पूछे बगैर नहीं होता, यह था दोनों परिवार के बीच के सम्बन्ध. भानु जी दादा-दादी दोनों के सामने चुनाव लड़े लेकिन हमारे पारिवारिक संबंधों में कभी नाम मात्र भी कटुता नहीं आई.

हमारे परिवार की सारी जन्म कुंडलियाँ उनके द्वारा ही बनायीं गयी है. कुछ वर्षों पहले मैंने एक चुनाव लड़ने का मानस बनाया. सबसे पहले पापा – मम्मी उन्हीं के पास मेरी पत्री ले कर गए, देखते ही उन्होनें चुनाव ना लड़ने की हिदायत दी. लेकिन मेरी जिद और कुछ नासमझी में वोह चुनाव मैं लड़ा और हारा. बात को स्पष्ट कहना उनकी आदत थी चाहे तब कही या कहीं मिल जाते और मेरा वज़न बड़ा होता तो वहीँ टोक देते थे. ऐसे थे भानु जी ….

कई बार उनसे मिलने के लिए सोचना पड़ता था क्योंकि बाउजी के पास किस्सों का पिटारा था और उनसे मिलना मतलब पूरा समय देना क्योंकि उन किस्सों में समय का मालूम ही नहीं चलता. बीते कुछ वर्षों से उनका फेसबुक पर दिखना एक सुखद अनुभव था. उदयपुर और राजस्थान में उन्होंने जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी का ऐसा बीज बोया जिसके फलों का फायदा आज उनकी पार्टी को मिल रहा.

आखरी बार उन्हीं के घर पर उनके ९२ वें जन्मदिन के मौके पर मिलना हुआ और उम्र के उस पड़ाव में भी उनकी कभी न कम होने वाली उर्जा और बुलंद आवाज़ अब हमेशा कानों में गूंजती रहेगी ……